Classification of Indian History

Classification of Indian History: इतिहास के अध्ययन का मतलब होता है राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में परिवर्तन के तत्वों को रेखांकित करना एवं उसका अध्ययन करना। भारतीय इतिहास के अध्ययन को सहज बनाने के लिए इसे बिभिन्न कालखंडों मे बांटा गया है। 

First classification of Indian History | भारतीय इतिहास का पहली बार वर्गीकरण

1817 में ब्रिटिश साम्राज्यवादी लेखक जेम्स मील ने भारत का पहला इतिहास लिखा। उन्होंने भारतीय इतिहास का वर्गीकरण राजवंशों के आधार पर किया एवं भारतीय इतिहास को तीन कालखंडों में विभाजित कर दिया। हिंदू काल, मुस्लिम काल एवं ब्रिटिश काल। परंतु बाद में इन तीनों ही शब्दों को अस्वीकार कर दिया गया।

  1. हिन्दू काल
  2. मुस्लिम काल 
  3. ब्रिटिश काल

अस्वीकार करने का कारण

हिंदू काल को अस्वीकार करने का कारण – भारत के लोग अपने को हिंदू नहीं कहते थे। हिन्दू शब्द अरब के लोगों के द्वारा दिया गया है। जो लोग सिंधु नदी के पूरब रहते थे, उन्हे वे लोग हिन्दू कहते थे। सिंधु शब्द से हिन्दू शब्द निकला है। इस प्रकार 8वी सदी मे भारत के लोगों को हिन्दू कहा जाने लगा। प्राचीन काल मे हिन्दू सामान्यता ब्राहमण के लिए प्रयुक्त किया जाता था। परंतु, इसके समकालीन बौद्ध एवं जैन पंथों का भी विकास हुआ इसलिए इन्हे हिन्दू की परिधि मे रखना उचित नहीं माना गया। इसलिए इस काल को हिन्दू काल का नाम देना अस्वीकार कर दिया गया।

मुस्लिम काल को अस्वीकार करने का कारण – इसका एक कारण यह की भारतीय इतिहास मे मुस्लिम सत्ताधारी जरूर रहे है, परंतु इनकी संख्या हिंदुस्तान मे बहुत कम थी। जबकि बहुसंख्यक प्रजा हिन्दू थी। इसका दूसरा कारण है की मोहम्मद गौरी ने अगर मुस्लिम शासन की स्थापना किया तो मात्र दिल्ली और अजमेर मे किया। मात्र इसी आधार पर पूरे भारत के इतिहास के कालखंड को मुस्लिम काल का नाम देना उचित नहीं माना गया।

ब्रिटिश काल को अस्वीकार करने का कारण भारतीय इतिहासकारों एवं विद्वानों ने जेम्स मील की आलोचना करते हुए कहने लगे की अगर वो भारत के इतिहास को धर्म के आधार पर ही बाँट रहे थे तो हिंदू काल, मुस्लिम काल एवं ईसाई काल या क्रिश्चियन काल रख देते। ब्रिटिश काल क्यूँ रखा? ब्रिटिश लोग भारत के कभी नहीं हुए। वह अधिकांश समय भारत के बाहर से भारत का शोषण कर रहे थे। इस प्रकार ब्रिटिश काल का नाम देना अनुचित माना गया।

भारतीय लेखको द्वारा भारतीय इतिहास के कालखंडों का वर्गीकरण

भारतीय लेखको ने जेम्स मील के द्वारा भारतीय इतिहास का वर्गीकरण (हिन्दू काल, मुस्लिम काल एवं ब्रिटिश काल) का खंडन किया। इन लोगों ने भारतीय इतिहास के वर्गीकरण के लिए प्राचीन काल, मध्यकाल एवं आधुनिक काल शब्दों का प्रयोग किया। परंतु इन्होंने विभाजन का वही आधार रखा जो जेम्स मील ने रखा था। भारतीय इतिहास का यह वर्गीकरण 1953 तक चला। 

  1. प्राचीन काल – आरंभ से 1192 तक
  2. मध्य काल – 1192 मे मुहम्मद गौरी के आक्रमन के बाद से
  3. आधुनिक काल – 1757 मे प्लासी के युद्ध के बाद से

मार्क्सवादी लेखको के अनुसार भारतीय इतिहास का वर्गीकरण

मार्क्सवादी लेखको ने भारतीय इतिहास के वर्गीकरण में एक बहुत महत्वपूर्ण धारणा रखी। इन्होंने राजवंश के आधार पर इतिहास के वर्गीकरण को नाकारा। इन्होंने इतिहास की व्याख्या राजनीतिक परिवर्तन के बजाय आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तन पर बल देते हुए किया।

उदाहरण के लिए, मोहम्मद गौरी के आक्रमण पर पृथ्वीराज चौहान के पराजय के बाद तुर्की राज्य की स्थापना हुई। जहाँ से भारतीय इतिहास का मध्य काल माना जाता था। परंतु, इसका खंडन किया और पृथ्वी राज चौहान के पराजय और मोहम्मद गौरी के विजय पर न जोर देते हुए उन कारकों पर जोर दिया जिस वजह से पृथ्वी राज चौहान की पराजय हुई। इस प्रकार मार्क्सवादी लेखको ने यह धारणा प्रस्तुत किया कि आर्थिक परिवर्तन मुख होता है, और वही बाकी क्षेत्रों में परिवर्तन लाता है।

मार्क्सवादी लेखको के अनुसार भारतीय इतिहास का वर्गीकरण

  1. प्राचीन काल
  2. पूर्व मध्यकाल
  3. उत्तर मध्यकाल
  4. पूर्व आधुनिक काल
  5. आधुनिक काल

Classification of Indian History | Image

Classification of Indian History
Classification of Indian History

अगर आप UPSC परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो आप इन सभी विभिन्न दृष्टिकोणों को बारीकी से देखे। ये आपको भारत के इतिहास का एक पूरी तस्वीर प्राप्त करने में मदद करते हैं। ध्यान दें, आप सिर्फ तथ्यों को याद करने पर बल नहीं दे बल्कि विचारशीलता से सोचे और विषय को गहराई से समझने की कोशिश करे। ताकि अपनी परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन कर सकें।

How useful was this post?

Click on a star to rate it!

Average rating 0 / 5. Vote count: 0

No votes so far! Be the first to rate this post.

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

Search

Join Our Social Media

Enable Notifications OK No thanks