Structure of Society – समाज की संरचना

Structure of Society (समाज की संरचना)- पृथ्वी पर मौजूद मनुष्य ही एक ऐसा जीव है जो बाकी जीवों की तुलना में निम्न आधारों पर अधिक सक्षम हैं-

  • समृद्ध मस्तिष्क– मनुष्य अपने समृद्ध यह मस्तिष्क की वजह से प्रकृति के विपरीत किसी चीज़ का चुनाव कर सकता है। प्रकृति का दोहन करके, प्रकृति के विपरीत उन्नति कर सकता है। परन्तु, परन्तु कोई और प्राणी ऐसा नहीं कर सकता है। जैसे कि एक चिड़िया अपना घोंसला आज से कुछ साल पहले जैसे बनाते थी, आज भी वैसे ही बनाती हैं। इनमें किसी भी तरह का परिवर्तन या विकास देखने को नहीं मिला है। परंतु मनुष्य प्रकृति का दोहन करके आज बड़ी-बड़ी इमारतें बना रहा है।
  • सृजनशीलता– यह मनुष्य के मस्तिष्क का एक ऐसा गुण है जो मनुष्य को रचनात्मक बनाता है। जिससे मनुष्य अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किसी नई चीजों की खोज, निर्माण, उपचार आदि कर सकता है।
  • सीधा खड़ा होने की क्षमता– मनुष्य की शारीरिक संरचना कुछ इस प्रकार विकसित हो गई है कि मनुष्य दो पैरों के बल सीधा खड़ा हो सकता है।
  • हाथों की विशिष्ट बनावट– मनुष्य अपने एक हाथ में सुई पकड़कर दूसरे हाथ से उसमें धागा लगा सकते हैं, परंतु कोई और जानवर ऐसा नहीं कर सकता है।

मनुष्य अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए क्रिया करता है, अर्थात खुद की आवश्यकताओं को खुद से पूरा करता है एवं अंत:क्रिया करता है अर्थात् किसी दूसरे मनुष्य की सहायता लेता है या किसी दूसरे मनुष्य की सहायता करता है। इस प्रकार मनुष्य एक दूसरे से एक सामाजिक संबंध स्थापित कर देता है।

मनुष्य जिन लोगों से समाजिक संबंधों को बनाता है, उस समूह को समाज कहते हैं। अतः समाज का अर्थ होता है एक ऐसा समूह, जिसमें कोई व्यक्ति जन्म लेता है, क्रिया एवं अंत:र्क्रिया करके सामाजिक संबंध को स्थापित करके अपनी आवश्यकताओं को पूरा करता है, एवं उसी मर जाता है।

Indian Society in Hindi for UPSC
Structure of Society – समाज की संरचना

Structure of Society – समाज की संरचना

समाज में रह रहे लोगों की आवश्यकताएँ अलग-अलग प्रकार की होती है। लोग अपनी इन्हीं आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए समाज के विभिन्न समूहों से अलग-अलग प्रकार के संबंध स्थापित करते है, जो निम्नलिखित व्यवस्था को बनाते हैं-

  • आर्थिक व्यवस्था
  • नातेदारी व्यवस्था
  • शिक्षा व्यवस्था
  • राजनीति व्यवस्था
  • धार्मिक व्यवस्था
  • असमानता तथा ऊंच नीच का भेदभाव

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